Tue. Apr 16th, 2024

2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल तैयारी में जुट गए हैं. एक तरफ बीजेपी है तो दूसरी तरफ INDIA गठबंधन है. दोनों के लिए ही जातिगत जनगणना एक बड़ा मुद्दा है. विपक्ष ने जातिगत जनगणना का दांव चला है, वहीं बीजेपी हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे है. ऐसे में बीजेपी के लिए जातिगत जनगणना की काट ढूंढना परेशानी का सबब बन गया है.

बिहार में जातिगत जनगणना का फैसला हुआ तो बीजेपी सरकार में थी. अब वो खिलाफ है. नीतीश कुमार का फैसला विपक्ष के लिए कॉमन एजेंडा है. OBC के लिए नीतीश सरकार ने आरक्षण का कोटा बढ़ाए जाने का फैसला किया है. इसे विपक्ष का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है. बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण का कोटा 60 से बढ़ा कर 75 प्रतिशत करने का सुझाव दिया है. जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के फॉर्मूले पर उन्होंने ऐसा करने की सलाह दी है.

अगले लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी क्या अब नीतीश मॉडल के इस चक्रव्यूह में फंस सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे केंद्र की सत्ता में है. नीतीश के ओबीसी वाले दांव पर पीएम मोदी का बयान आया है. उन्होंने कहा कि OBC हितों का सबसे ज्यादा ध्यान बीजेपी रखती है. केंद्र सरकार में 27 ओबीसी मंत्री हैं. उन्होंने कहा कि देश में बीजेपी के 365 ओबीसी विधायक हैं. बीजेपी की पूरी कोशिश ये बताने की है कि पिछड़ों की असली शुभचिंतक बस वही है.

जातिगत जनगणना की काट ढूंढना बीजेपी के लिए चुनौती।

जातिगत जनगणना के विपक्ष के मुद्दे से कैसे निपटें? बीजेपी अभी ये तय ही नहीं कर पाई है. अब आरक्षण का कोटा बढ़ाने वाले विपक्ष के नए दांव ने मुसीबत और बढ़ा दी है. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व धर्म संकट में है. इसकी काट ढूंढना बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के लिए भी बड़ी चुनौती है. जातिगत जनगणना को फूट डालो राजनीति करने वाला का फॉर्मूला बताने वाली बीजेपी की रणनीति बदल गई है. छत्तीसगढ़ में पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा कि हमने कभी इसका विरोध नहीं किया है. लेकिन हम कोई फैसला जल्दबाजी में नहीं करना चाहते हैं. वैसे बीजेपी ने तेलंगाना में OBC नेता को सीएम बनाए जाने का ऐलान किया है. बीजेपी लगातार कोर्स करेक्शन कर रही है. अनुप्रिया पटेल और ओमप्रकाश राजभर जैसे बीजेपी के सहयोगियों का भी दबाव बढ़ रहा है. ये पार्टियां जातिगत जनगणना का समर्थन कर रही हैं.

राजनीतिक दलों के लिए जातिगत जनगणना बड़ा मुद्दा

क्या अगला लोकसभा चुनाव फिर मंडल बनाम कमंडल की तरफ बढ़ रहा है? विपक्ष की कोशिश तो यही है. इस मुद्दे पर अपने दोनों हाथ जला चुकी कांग्रेस ने अपना एजेंडा बदल लिया है. अब कांग्रेस का फॉर्मूला आरजेडी, जेडीयू और समाजवादी पार्टी का फॉर्मूला है. राहुल गांधी जगह-जगह जाकर मंचों से जातिगत जनगणना का वादा कर रहे हैं. इसीलिए तो मायावती से लेकर अखिलेश यादव तक राहुल गंधी पर तंज करते हैं. वो कहते हैं कि मंडल कमीशन का विरोध करने वाले अब कास्ट सेंसस के समर्थन में हैं. बिहार की नीतीश सरकार ने जातिगत सर्वे कर रिपोर्ट भी जारी कर दी है. लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने जो कास्ट सेंसस करवाया था, आज भी उसकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है. बीजेपी से मुकाबले के लिए कांग्रेस को इसके अलावा कोई और उपाय नहीं मिला. सॉफ्ट हिंदुत्व में पार्टी कई बार अपने हाथ जला चुकी है.

जातिगत जनगणना के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन एकजुट

लोकसभा चुनाव के लिए जातिगत जनगणना के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन एकजुट है. ये उसकी सबसे बड़ी कामयाबी है. दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक ये बड़ा मुद्दा है. विपक्ष का फोकस बीजेपी के गैर यादव OBC वाले सामाजिक समीकरण को तोड़ने पर है. बिहार से लेकर यूपी तक बीजेपी की ये नई ताकत है. हिंदुत्व के नाम पर वोट लेने की बीजेपी की एक लक्ष्मण रेखा है. लेकिन ओबीसी को अपना बना कर बीजेपी ने अपनी ताकत दोगुनी कर ली है. लेकिन अब उसे अपने पक्ष में बनाए रखना ही बीजेपी के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

पिछड़ों के साथ हिंदुत्व के सहारे बीजेपी

क्या मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की गिनती बता कर बीजेपी का काम चल जाएगा. केंद्र में जीत का हैट्रिक बनाने की तैयारी में जुटी बीजेपी दो मोर्चों पर काम कर रही है. एक तरफ वो पिछड़ों के लिए काम काज का बखान कर रही है. दूसरी तरफ हिंदुत्व की खिचड़ी पकाई जा रही है. अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के नाम पर माहौल बनाया जा रहा है. पीएम नरेन्द्र मोदी, अमित शाह से लेकर योगी आदित्यनाथ अब लोगों को अयोध्या आने का निमंत्रण दे रहे हैं. राम मंदिर का फैसला कोर्ट से आया. लेकिन इसका क्रेडिट बीजेपी से रही है. ये कांग्रेस से लेकर जेडीयू और समाजवादी पार्टी की सबसे कमजोर कड़ी है. बीजेपी के जवाब में कमलनाथ जैसे सीनियर नेता भी आ गए है. वो कहने लगे हैं कि राम मंदिर का ताला तो राजीव गांधी के समय खुला था. कांग्रेस इससे पहले भी कई बार बीजेपी के हिंदुत्व के जाल में फंस चुकी है.

दलित-OBC वोट पर बीजेपी की नजर

बीजेपी ने हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन समीकरण बना रखा है. इंडिया गठबंधन की रणनीति में जातिगत जनगणना और फिर उस हिसाब से आरक्षण देना है.अगर इस बहाने बीजेपी का समीकरण बिगड़ा तो लोकसभा चुनाव का खेल भी बिगड़ सकता है. बिहार में तो बीजेपी कभी जातिगत सर्वे का समर्थन करने लगती है, तो कभी इसके आंकड़ों पर सवाल उठाने लगती है. अमित शाह कहते हैं कि यादव और मुसलमान की गिनती बढ़ा दी गई है. सुशील मोदी कहते हैं सर्वे कराने का फैसला तो हमारा भी था. इंडिया गठबंधन अब देश में जातिगत जनगणना की मांग कर रहा है. देश के करीब पचास फीसदी OBC वोट पर उसकी नजर है. बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत तो खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं. पीएम मोदी का पिछड़ा होना है. जब तक कोई फार्मूला नहीं निकलता है बीजेपी डबल पिच पर बैटिंग के मूड में है.